ज्ञान के सागर, भोले शंकर ।


ज्ञान के सागर,
भोले शंकर ।
कृपा निरंतर,
सदा महेश्वर ।।

वर्षा कर दो,
अपने तेज की ।
कष्ट हटे और,
बजे शिव ध्वनि ।।

अपनी जटा में,
समेट लो गंगा ।
निर्मल हो जल,
दूर हो शंका ।।

अपने क्रोध को,
फिर से दिखा दो ।
मृदा दोष को,
दूर करा दो ।।

ज्ञान के सागर,
भोले शंकर ।
कृपा निरंतर,
सदा महेश्वर ।।

शरण बुला लो,
जीना कठिन है ।
प्राण वायु अब,
थोड़ी सी भिन्न है ।।

वेद-स्वरूपी,
शिव वाणी से ।
वायु का,
उपचार बता दो ।।

कृपा कर दो,
अपने प्रियों पर ।
इतना तो,
अधिकार दिला दो ।।

ज्ञान के सागर,
भोले शंकर ।
कृपा निरंतर,
सदा महेश्वर ।।

मेरा मुझ से,
मोह बहुत है ।
दूर करा कर,
पास बुला लो ।।

धर्म की रक्षा,
करो परमेश्वर ।
रूद्र-रूपी,
अवतार लो ईश्वर ।।

नृत्य करें,
नटराज जी गाए ।
शोक हटे सब,
खुश हो जाये ।।

इतना सा आभार ,
दिखा दो ।

ज्ञान के सागर,
भोले शंकर ।
कृपा निरंतर,
सदा महेश्वर ।।

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