एक तुम हो, जिसके जनाजे में अपनों ने आँसू ना बहाए ।


एक तुम हो,
जिसके जनाजे में अपनों ने
आँसू ना बहाए ।
एक वो हैं, जिनकी
ख़बर में ही
ग़मो की बाढ़ सी आ गयी ।
एक मैं हूँ,
चला जा रहा हूँ ।
पता है,
परिणाम क्या होगा।
फिर भी,
रुक नही रहा हूँ ।
अंत में
अग्नि से सत्कार होगा ।
कुछ नही ले जाऊंगा,
फिर भी संजो रहा हूं ।
किसके लिये,
कोई है भी नही।
जिसे अपनी
वसीयत दूँ ।
क्या दूँ,
कुछ है भी तो नहीं ।
प्यार कमाया है,
विरासत नहीं ।
एक मैं हूँ ,
चला जा रहा हूँ ।
पता है,
परिणाम क्या होगा ।
आखिरकार अग्नि से सत्कार होगा ।

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